
✒️ लेखक: प्रियांशु मल्होत्रा, संपादक-इन-चीफ़, जनता की आवाज़ 24/7
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से खिलवाड़ = अपराध
भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ प्रेस और मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। पत्रकार वो लोग हैं जो भ्रष्टाचार, अन्याय और अत्याचार को जनता तक पहुँचाते हैं। अगर इनकी साख पर हमला होगा तो यह सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला होगा।
लेकिन आजकल सोशल मीडिया – WhatsApp ग्रुप, Facebook, Instagram और X (Twitter) – पर कुछ लोग गाली-गलौज पर उतर आते हैं। पत्रकारों को “फर्जी”, “दलाल”, “बिकाऊ” कहकर वे यह भूल जाते हैं कि उनकी ये भाषा सिर्फ असभ्यता नहीं, बल्कि कानूनी अपराध है।
ये क्यों ग़लत है?
1. मानहानि का मामला:
IPC की धारा 499 और 500 साफ कहती हैं कि किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना अपराध है।
सज़ा: दो साल तक जेल + जुर्माना।
2. आईटी एक्ट का डंडा:
सोशल मीडिया पर किया गया हर पोस्ट या मैसेज डिजिटल सबूत है।
साइबर सेल लोकेशन ट्रैक कर मिनटों में आरोपी तक पहुँच सकती है।
आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत तीन साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

3. संविधान का नियम:
अनुच्छेद 19(1)(a) हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।
लेकिन अनुच्छेद 19(2) के तहत मानहानि, शांति भंग, अश्लीलता और झूठे आरोप इस आज़ादी के बाहर आते हैं।
मतलब साफ – पत्रकार को गाली देना आज़ादी नहीं, अपराध है।
आपके खिलाफ क्या-क्या हो सकता है?
एफआईआर दर्ज होगी और आपको थाने में घंटों बैठना पड़ेगा।
मानहानि का केस चलेगा और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगेंगे।
जेल की हवा और भारी जुर्माना दोनों झेलने पड़ सकते हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट बैन या सस्पेंड हो सकता है।
नौकरी, करियर और समाज में आपकी साख मिट्टी में मिल जाएगी।
सबूत कभी नहीं मिटते
आप सोचते हैं कि WhatsApp मैसेज डिलीट कर देंगे तो बच जाएँगे?
सच ये है कि पुलिस और साइबर सेल के पास आपके सारे चैट बैकअप, स्क्रीनशॉट, सर्वर लॉग मौजूद होते हैं।
यानी आपका एक-एक शब्द अदालत में हथियार की तरह इस्तेमाल होगा।
कानून की धाराएँ और सज़ा
अपराध धारा संभावित सज़ा
मानहानि IPC 499-500 2 साल जेल + जुर्माना
धमकी/गाली IPC 506 7 साल तक की सज़ा
अफवाह फैलाना IPC 505 3 साल तक जेल
आपत्तिजनक पोस्ट IT Act 67 3 साल जेल + जुर्माना
लोकशांति भंग IPC 504 2 साल तक की जेल
पत्रकार = समाज की आवाज़
पत्रकारों को गाली देना सिर्फ एक इंसान को गाली देना नहीं है, बल्कि पूरे समाज, जनता और लोकतंत्र की आवाज़ को अपमानित करना है। याद रखिए –
पत्रकार पर हमला मतलब जनता की आवाज़ पर हमला।
पत्रकार की इज्ज़त गिराना मतलब लोकतंत्र की नींव हिलाना।
सोच लीजिए – वरना पछताइए
क्या एक WhatsApp मैसेज आपकी जिंदगी और करियर बर्बाद करने के लिए काफी नहीं है?
क्या Facebook पर लिखा गया एक कमेंट आपको जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुँचा सकता?
क्या Insta पर किया गया एक पोस्ट आपकी इज्ज़त और परिवार की शांति खत्म नहीं कर सकता?
नतीजा साफ है
पत्रकारों को सोशल मीडिया पर “फर्जी-दलाल” कहना अब कोई मजाक नहीं।
ये सीधा-सीधा कानूनी अपराध है जिसकी कीमत आपको जेल, जुर्माना और बदनामी से चुकानी पड़ेगी।
अगली सुर्खी यही होगी –
“पत्रकार को गाली देने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।”

