
बांकीमोंगरा (स्पेशल रिपोर्ट)।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के प्रतिष्ठित व्हाट्सऐप समूह “हमर बांकी मोंगरा” में डाले गए दो संदेशों ने इन दिनों नगर की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
पहला संदेश इस प्रकार था—
“भ्रष्टाचारी बंद करना है। कोई भी ठेकेदार से यदि किसी ने भी रिश्वत मांगे हैं या आप लोग दिए हैं तो शिकायत करें 9981336100 — उपाध्यक्ष गायत्री कंवर, नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा।”
यह संदेश सुनने में सामान्य लग सकता है, लेकिन इसकी असलियत ने लोकतंत्र और पालिका दोनों की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, यह संदेश उपाध्यक्ष गायत्री कंवर ने नहीं, बल्कि उनके पति गोवर्धन कंवर ने डाला था, जो कि SECL के कर्मचारी हैं।
किस अधिकार से जनता को संदेश?

गोवर्धन कंवर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। जनता ने उन्हें वोट नहीं दिया और न ही वे किसी संवैधानिक पद पर हैं। फिर किस अधिकार से वे “उपाध्यक्ष” के नाम पर सार्वजनिक मंच में भ्रष्टाचार विरोधी अपील कर रहे हैं?
यह सीधे-सीधे जनादेश का अपमान और पालिका की गरिमा से खिलवाड़ है।
अब नया विवाद: रेती कारोबार का नंबर भी साझा

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। उसी समूह में गोवर्धन कंवर का एक और संदेश सामने आया जिसमें उन्होंने खुलेआम लिखा—
“बालू (रेत) के लिए संपर्क करें” और इसके साथ मोबाइल नंबर भी दिया।
यह संदेश उस समय आया है जब बरसात के मौसम में शासन द्वारा रेत उत्खनन और परिवहन पर पूर्ण रोक लगी हुई है। ऐसे में जनता सवाल उठा रही है कि—
👉 भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करने वाले गोवर्धन कंवर खुद अवैध रेत कारोबार का प्रचार किस अधिकार से कर रहे हैं?
👉 क्या यह केवल निजी स्वार्थ है या पालिका के नाम पर चल रहा कोई छुपा खेल?
क्या यह “प्रॉक्सी राजनीति” है?
जब जनता ने उपाध्यक्ष चुना है तो जनता उनसे सुनना चाहती है। लेकिन यदि उनकी जगह उनके पति बयान और नंबर जारी करते हैं तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि—
👉 क्या उपाध्यक्ष गायत्री कंवर खुद फैसले लेने में सक्षम नहीं?
👉 क्या पालिका की बागडोर अब परदे के पीछे से उनके पति चला रहे हैं?
पार्टी की छवि पर सीधा प्रहार
पालिका का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के हाथों में है। ऐसे में जब उपाध्यक्ष के नाम पर उनके पति खुद भ्रष्टाचार और अवैध रेत कारोबार से जुड़े संदेश सार्वजनिक कर रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे पार्टी की साख पर चोट है।
जनता पूछ रही है—
“जब भाजपा से जुड़े प्रतिनिधियों के नाम पर ही इस तरह के विवादित संदेश वायरल हो रहे हैं तो क्या वास्तव में पार्टी की पालिकाओं में पारदर्शिता है?”
जनता के तीखे सवाल
- गोवर्धन कंवर: SECL कर्मचारी होते हुए उन्होंने किस हैसियत से उपाध्यक्ष के नाम पर भ्रष्टाचार शिकायत और रेती बिक्री का नंबर सार्वजनिक किया?
- गायत्री कंवर: क्या वे अपने नाम का इस्तेमाल पति द्वारा होने दे रही हैं या उनकी जानकारी के बिना यह सब हो रहा है?
- नगर पालिका परिषद: क्या जनता के लिए कोई आधिकारिक शिकायत चैनल है? यदि है तो फिर उसका प्रचार क्यों नहीं?
- भाजपा नेतृत्व: क्या यह अपनी ही पार्टी और संगठन की छवि धूमिल करने का जानबूझकर रचा गया खेल है?
निष्कर्ष – जवाब देना ही होगा
पालिका जनता की आस्था और विश्वास पर खड़ी संस्था है। उसके चुने हुए पद का नाम लेकर किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति द्वारा न सिर्फ भ्रष्टाचार की शिकायत का नंबर साझा करना बल्कि अवैध रेत कारोबार का प्रचार करना लोकतंत्र और कानून – दोनों के खिलाफ है।
गोवर्धन कंवर को यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने यह संदेश किस अधिकार से डाला। वहीं उपाध्यक्ष गायत्री कंवर को भी सामने आकर जनता को बताना होगा कि क्या वे इस सबके पीछे खड़ी हैं या नहीं।
जब तक यह स्पष्ट नहीं होता, जनता के मन में यही सवाल गूंजता रहेगा—
👉 “क्या बांकीमोंगरा की पालिका चुने हुए प्रतिनिधियों से चल रही है या परदे के पीछे उनके परिजनों से?”
