
नगर पालिका परिषद बाँकी मोंगरा में मंगलवार को उस वक्त सियासी माहौल गरमा गया, जब विपक्षी पार्षदों ने सीएमओ को एक सख़्त ज्ञापन सौंपते हुए मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। ज्ञापन सौंपते ही साफ संकेत दे दिया गया कि अब प्रतीक्षा नहीं—निराकरण चाहिए।
ज्ञापन में राशन कार्ड की लेटलतीफ़ी, पेयजल व्यवस्था की लापरवाही, मुख्य चौक से मोहल्लों तक ख़राब स्ट्रीट लाइट, सफ़ाई व्यवस्था की चरमराहट समेत कुल पाँच बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की माँग की गई है। विपक्ष का दावा है कि इन समस्याओं को लेकर नागरिक लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नदारद हैं।
अंदर की बात यह है कि पार्षदों ने केवल माँगें ही नहीं रखीं—बल्कि समय-सीमा भी तय करने का दबाव बनाया। सूत्रों के अनुसार, यदि तय अवधि में ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो परिषद क्षेत्र में उग्र आंदोलन की रणनीति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह चेतावनी प्रशासन के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही है।
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के नेतृत्व में पार्षद तेजप्रताप सिंह, रूबी गुप्ता (पवन गुप्ता), राकेश अग्रवाल, राजकुमार मिश्रा, तालिका साहू (लालू साहू), संदीप डहरिया, हेमंत साहनी, इंद्रजीत बींझवार, केशव नाहक सहित बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बुनियादी जरूरतों पर राजनीति नहीं—समाधान चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ज्ञापन के बाद प्रशासन हरकत में आएगा? या फिर बाँकी मोंगरा की गलियों से चौक-चौराहों तक आंदोलन की आहट सुनाई देगी? आने वाले दिन नगर की सियासत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
