
कुसमुंडा से देव साव की रिपोर्ट
कोरबा।
SECL कुसमुंडा क्षेत्र में मजदूरों के हितों की लगातार अनदेखी और प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त श्रम संघ द्वारा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन किया गया। यह धरना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी, ठेका मजदूर एवं विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
संयुक्त श्रम संघ ने आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा जारी कार्यवृत्त पत्र क्रमांक 2710 दिनांक 05.11.2025 में कई गंभीर त्रुटियाँ हैं। केवल आवास आवंटन से जुड़े बिंदु को प्रमुखता देकर चार श्रमिक संगठनों को बदनाम किया गया, जबकि बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों पर आज तक अमल नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि खदान में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं है।
धरना प्रदर्शन में ठेका कर्मियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। श्रमिक संगठनों का कहना है कि पूर्व बैठकों में यह तय हुआ था कि पहले ठेका कर्मियों की उपस्थिति बायोमैट्रिक से दर्ज की जाएगी, लेकिन इसके विपरीत नियमित कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि संवेदी पदों पर वर्षों से जमे अधिकारियों व कर्मचारियों का रोटेशन केवल कागजों में सीमित है। वास्तविक कार्यस्थलों पर रोटेशन लागू नहीं होने से पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खदान में डीजल चोरी की बढ़ती घटनाओं को लेकर भी श्रमिक संगठनों ने नाराजगी जताई। संघ का कहना है कि RFID व्यवस्था के बावजूद चोरी पर अंकुश नहीं लग पाया है और बिना ठोस जांच के डंपर ऑपरेटरों को आरोपित किया जा रहा है, जिससे मजदूरों में भय का माहौल है।
इसके साथ ही DGMS के निर्देशों के विपरीत भारी वाहनों का एक ही हॉल रोड पर संचालन किया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। श्रम संघ ने इसे मजदूरों की जान से खिलवाड़ बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की।
धरना प्रदर्शन के दौरान संयुक्त श्रम संघ ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मजदूर हितों से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। अंत में सभी कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष को सफल बनाने की अपील की गई।

