
बाकी मोगरा (छत्तीसगढ़)। विजयदशमी के पावन अवसर पर ग्राम बाकी मोगरा में मंगलवार को परंपरागत शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और महिलाएँ इस सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनीं।
कार्यक्रम में हाई कोर्ट के एडवोकेट बृजेश सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संघकार्यवाह श्याम सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। अतिथियों ने शस्त्र पूजन की परंपरा को भारत की गौरवशाली संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत कहा।
विजयदशमी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार विजयदशमी का दिन सत्य पर असत्य और धर्म पर अधर्म की विजय का प्रतीक है। इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा है, ताकि समाज में वीरता, साहस और धर्म रक्षा का संकल्प जीवित रहे।
गाँव में उमड़ा उत्साह
आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएँ और युवा वर्ग मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान बना रहा। पारंपरिक शस्त्रों के साथ आधुनिक साधनों का भी पूजन किया गया और उनसे समाजहित में उपयोग का संकल्प लिया गया।
वक्ताओं का संदेश
एडवोकेट बृजेश सिंह ने कहा कि शस्त्र केवल आत्मरक्षा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह संस्कृति और परंपरा की रक्षा का भी दायित्व निभाते हैं। आने वाली पीढ़ियों को इस धरोहर से जोड़ना जरूरी है।
संघकार्यवाह श्याम सिंह ने कहा कि परंपराएँ ही समाज की पहचान होती हैं। विजयदशमी का संदेश है कि जब तक अन्याय और अधर्म मौजूद है, तब तक धर्म और न्याय की रक्षा के लिए समाज को सजग रहना होगा।
श्रद्धा और परंपरा का संगम
पूरे आयोजन में श्रद्धा, आस्था और परंपरा का सुंदर मेल देखने को मिला। ग्रामीणों ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बताया।
— रिपोर्ट : प्रियंशु मल्होत्रा

