
बिलासपुर। जन्माष्टमी का पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शहर को उत्सव और उल्लास से सराबोर कर गया। इस बार भी मंगला चौक व्यापारी संघ द्वारा आयोजित मलखम्ब दही-हांडी महोत्सव ने परंपरा, साहस और आस्था का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।
सुबह से ही मंगला चौक पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। युवाओं का जोश, महिलाओं की श्रद्धा और व्यापारियों का उत्साह पूरे माहौल को धार्मिक मेले जैसा बना रहा था। हर तरफ श्रीकृष्ण की भक्ति गीत और “जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजते रहे।
20 फीट ऊँचा पोल बना आकर्षण का केंद्र
इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता रही लगभग 20 फीट ऊँचे खंभे पर बंधी दही-हांडी। इसे फोड़ने के लिए युवाओं ने कई बार साहसिक प्रयास किए। बार-बार असफल होने पर भी उनका हौसला डिगा नहीं। दर्शक भी तालियां बजाकर प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते रहे।

अंततः घरूउमेरी, बिलासपुर के युवक करण पात्रे ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पोल पर चढ़कर दही-हांडी को फोड़ दिया। जैसे ही हांडी टूटी, दही और माखन बिखरने के साथ ही चारों ओर जयघोष गूंज उठा और उपस्थित भीड़ खुशी से झूम उठी।
विजेता को मिला सम्मान और पुरस्कार
विजेता करण पात्रे को मंगला चौक व्यापारी संघ की ओर से प्रथम पुरस्कार स्वरूप ₹5100 की नकद राशि प्रदान की गई। सम्मान पाकर करण ने इसे अपनी टीम और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित किया।
मुख्य अतिथि ने किया दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला भाजपा उपाध्यक्ष अजीत सिंह भोगल ने भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा— “जन्माष्टमी का यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा का प्रतीक है, बल्कि युवाओं को साहस, धैर्य और एकजुटता का संदेश भी देता है।”

हरजीत सिंह (सो्नु रिहल) का नेतृत्व बना पहचान
यह महोत्सव पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इस परंपरा को बनाए रखने का श्रेय मंगला चौक व्यापारी संघ के अध्यक्ष हरजीत सिंह (सो्नु रिहल) को जाता है।
हरजीत सिंह ने हमेशा इस आयोजन को सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक बनाए रखने का प्रयास किया है। उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन अब केवल दही-हांडी तक सीमित न रहकर पूरे बिलासपुर शहर की पहचान बन चुका है।
हरजीत सिंह का कहना था— “श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हम सबको यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, यदि हम धैर्य और साहस से डटे रहें तो विजय निश्चित होती है।”
व्यापारी वर्ग और युवाओं की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम में महावीर अग्रवाल, जगत छाबड़ा, विकास गुप्ता, अरविंद अग्रवाल, लव यादव, दिनेश पटेल सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और युवा शामिल हुए। सबने मिलकर आयोजन की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखा।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम
महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि दही-हांडी केवल एक खेल नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण की लीलाओं को जीवंत करने का माध्यम है। यह परंपरा बच्चों और युवाओं में समर्पण, साहस और टीम भावना जगाने का कार्य करती है।
इस अवसर पर पूरे चौक को रंग-बिरंगी झालरों और लाइटों से सजाया गया था। बच्चों ने श्रीकृष्ण व राधा के रूप में सजीव झांकियां प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
आयोजन बना अविस्मरणीय
भक्ति, उल्लास और रोमांच से परिपूर्ण यह महोत्सव देर रात तक चलता रहा। अंत में सभी ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
