तीन दिन सामूहिक अवकाश पर कर्मचारी… ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर बड़ा धमाका!**

बिलासपुर।
क्या बिलासपुर में अगले तीन दिन प्रशासनिक कामकाज ठप होने वाला है?
क्या सड़कों पर उतरेंगे हजारों कर्मचारी?
और क्या सरकार पर बनेगा जबरदस्त दबाव?
इन तमाम सवालों के जवाब 29, 30 और 31 दिसंबर को मिलने वाले हैं, जब छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले कर्मचारी तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर सड़कों पर उतरने जा रहे हैं।
नेहरू चौक बनेगा आंदोलन का केंद्र
फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि आंदोलन की मुख्य धुरी नेहरू चौक, बिलासपुर रहेगा। यहां से प्रदेश सरकार को सीधा संदेश दिया जाएगा—
अब सिर्फ आश्वासन नहीं, “मोदी की गारंटी” जमीन पर चाहिए।
ब्लॉक से जिला मुख्यालय तक ‘हल्ला बोल’
आंदोलन सिर्फ चौक-चौराहों तक सीमित नहीं रहेगा। ब्लॉक और जिला मुख्यालयों में हल्ला बोल प्रदर्शन कर प्रशासन को चेताया जाएगा कि अगर अब भी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा।
11 मांगें… जिनसे सरकार की बढ़ेगी टेंशन
कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों में शामिल हैं—. केंद्र के समान DA-DR लागू करना
- केंद्र के समान DA-DR लागू करना
- 2019 से लंबित DA एरियर्स का भुगतान
- शिक्षकों, स्वास्थ्य व अन्य विभागों की विसंगतियां दूर करना
- कैशलेस चिकित्सा सुविधा
- अनुकंपा नियुक्ति नियमों में राहत
- संविदा व दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण
ये मांगें सीधे-सीधे सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करती हैं।
“लड़कर लिया है, लड़कर लेंगे” — सीधा ऐलान
फेडरेशन ने दो टूक कहा है—
यह आंदोलन चेतावनी नहीं, आर-पार की लड़ाई है।
अगर अब भी सरकार ने आंखें मूंदी, तो कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं।
“लड़कर लिया है, लड़कर लेंगे — मोदी की गारंटी लेकर रहेंगे”
इस नारे के साथ कर्मचारी सरकार की परीक्षा लेने जा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल — झुकेगी सरकार या बढ़ेगा आंदोलन?
29 दिसंबर से शुरू होने वाला यह आंदोलन
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

अब देखना यह है कि
सरकार पहले फैसला लेती है
या सड़क पर उतर चुकी आवाज़
हालात बदलने पर मजबूर कर देती है।

