
पोंडी उपरोड़ा (कोरबा)।
जब शिक्षा को सेवा समझा जाए, तो मुश्किलें भी प्रेरणा में बदल जाती हैं। प्राथमिक शाला केन्दाईखार में पदस्थ शिक्षिका मिनी त्रिपाठी नागवंशी ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसा कदम उठाया है, जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है।
दरअसल, शिक्षिका का निवास स्थान तुमान के पास है, जबकि उनका कार्यस्थल लगभग 50 किलोमीटर दूर है। रोज़ इतनी दूरी तय कर स्कूल पहुँचना कठिन था और इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षिका ने स्वयं पहल करते हुए विभाग से निवेदन किया कि उन्हें एक माह के लिए नज़दीकी आश्रम शाला तुमान में पढ़ाने की अनुमति दी जाए।
यह अनुरोध केवल अपनी सुविधा के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई निरंतर चलती रहे, इसके लिए किया गया।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पोंडी उपरोड़ा ने उनकी सोच की प्रशंसा करते हुए कहा –
> “जहाँ शिक्षक खुद आगे आकर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास करते हैं, वहाँ बच्चों के भविष्य की राह और भी आसान हो जाती है। मिनी नागवंशी ने साबित किया है कि असली शिक्षक वही है, जो बच्चों की भलाई को सबसे ऊपर रखे।”
गांव के लोगों और अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आज के दौर में जब कई जगह शिक्षकों की उपस्थिति ही समस्या बन जाती है, ऐसे समय में मिनी नागवंशी जैसी शिक्षिकाएँ प्रेरणा की मिसाल हैं।
उनका यह जज्बा न केवल विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है, बल्कि अन्य शिक्षकों और समाज के लिए भी एक संदेश है कि “सच्ची निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी, शिक्षा को ही नहीं, पूरी पीढ़ी को संवार देती है।”
