कोरबा।
एसईसीएल की बगदेवा परियोजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां एक आदिवासी भूमि स्वामी की अर्जित ज़मीन पर गैर-आदिवासी व्यक्ति द्वारा फर्जी दस्तावेज़ और कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हथियाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित आदिवासी पतिराम पिता गौटिनराम (जाति – गोंड़) ने अब एसईसीएल मुख्यालय से लेकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, रायपुर तक शिकायत दर्ज कर दी है।
ज़मीन पतिराम की, नौकरी बिसम्भर की!
शिकायत के मुताबिक ग्राम बेलटिकरी, तहसील दीपका स्थित पतिराम की 2.27 एकड़ पैतृक भूमि एसईसीएल द्वारा अर्जित की गई थी। नियम साफ है—भूमि देने वाले खातेदार या उसके आश्रित को मुआवजा और नौकरी। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही निकली।
आरोप है कि बिसम्भर पिता रतिराम (जाति यादव), निवासी दादर (मोहनपुर), चैतमा ने फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर, भूमि अभिलेखों में अवैध विखंडन कराते हुए और फर्जी जाति प्रमाण पत्र पेश कर एसईसीएल की बगदेवा परियोजना में नौकरी हासिल कर ली।
बड़ा सवाल: बिना मिलीभगत कैसे हुई नौकरी?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद एसईसीएल के सत्यापन तंत्र ने आंखें कैसे मूंद लीं?
आदिवासी की जमीन पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम कैसे चढ़ गया?
जाति प्रमाण पत्र और भूमि दस्तावेज़ों की जांच किस स्तर पर की गई?
और किसकी मिलीभगत से फर्जी नियुक्ति संभव हो पाई?
अनपढ़ होने का उठाया गया फायदा
पीड़ित पतिराम का कहना है कि वह अनपढ़ होने के कारण वर्षों तक इस धोखाधड़ी को समझ नहीं पाए। जब वारिसों ने दस्तावेज़ खंगाले, तब जाकर यह खुलासा हुआ कि उनके हक की नौकरी कोई और कर रहा है। इस फर्जीवाड़े ने न सिर्फ परिवार को रोजगार से वंचित किया, बल्कि आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला किया है।
विजिलेंस और एससी–एसटी आयोग तक पहुंची शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत
एसईसीएल के प्रबंध सह निदेशक,
मुख्य विजिलेंस अधिकारी (CVO),
कोरबा क्षेत्रीय महाप्रबंधक,
डेलवाडीह परियोजना के कार्मिक प्रबंधक,
तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, रायपुर
को सौंपी गई है।
अब कार्रवाई या लीपापोती?
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या एसईसीएल इस मामले में फर्जी नौकरी रद्द कर दोषी पर एफआईआर दर्ज करेगा?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबाकर आदिवासी को ही न्याय के लिए भटकने पर मजबूर किया जाएगा?
यह प्रकरण सिर्फ एक नौकरी का नहीं, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और सार्वजनिक उपक्रमों की जवाबदेही का है।
नज़र अब एसईसीएल प्रबंधन और जांच एजेंसियों पर टिकी है।
