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बांकीमोंगरा में कानून को खुली चुनौती – नगर पालिका, पुलिस और जिम्मेदार अधिकारी सब चुप, विवादित भूमि पर कोर्ट की मोहर लगी रोक के बावजूद दिन-रात चल रहा निर्माण
बांकीमोंगरा (संवाददाता)।
चंडी मंदिर के पास इन दिनों एक ऐसा निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है, जो कानून और न्याय के मुंह पर खुला तमाचा है। मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश की धज्जियां उड़ाने का है।
आरोप है कि हनुमान चौक स्थित ‘यूथ बंसल’ कपड़े की दुकान के संचालक दिनेश अग्रवाल पिता स्व. गोविंद अग्रवाल इस विवादित भूमि पर पक्का मकान निर्माण करा रहे हैं, जबकि इस भूमि पर 25 अप्रैल 2025 से ही कोर्ट का स्टे ऑर्डर लागू है।
कोर्ट का सख्त आदेश – फिर भी जारी निर्माण
अति. तहसीलदार, कटघोरा (जिला कोरबा) ने आदेश संख्या 2311/अति.तह/वाचक-2/2025 के तहत ग्राम मोहारा स्थित खसरा नंबर 520/2, 520/5, 0360, 0360 ख (कुल 18 डिसमिल) भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण रोकने का आदेश जारी किया।
यह भूमि राजस्व अभिलेख में रविन्द्र सिंह पिता महेन्द्र सिंह के नाम दर्ज है। आदेश में साफ उल्लेख है कि:
दिनेश अग्रवाल ने लगभग 3000 वर्गफीट क्षेत्र में कब्जा करके पक्का मकान निर्माण शुरू कर दिया।
कोर्ट ने इसे छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 250(3) के तहत अवैध माना और तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया।
धारा 250(3) क्या कहती है?

यह प्रावधान स्पष्ट करता है कि यदि किसी भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण हो रहा हो, तो प्रशासन तत्काल कब्जा खाली करवा सकता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। आदेश की अवहेलना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है, जिसके लिए जुर्माना और सजा दोनों हो सकते हैं।
नगर पालिका की चुप्पी – शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस अवैध निर्माण की शिकायत कुछ दिन पहले नगर पालिका बांकीमोंगरा में लिखित रूप से की गई थी। आवेदन में साफ लिखा था कि चंडी मंदिर के पास विवादित भूमि पर निर्माण हो रहा है।
लेकिन पालिका के अधिकारी, जिनका काम ऐसे निर्माणों को रोकना है, उन्होंने मौके पर जाकर देखने की भी ज़हमत नहीं उठाई। न कोई नोटिस, न कोई जांच—बस फाइलों में दबा कर मामला खत्म।
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
कोर्ट ने थाना प्रभारी बांकीमोंगरा को आदेश की प्रति देकर पालन सुनिश्चित करने को कहा था।
लेकिन आज तक न तो मौके पर न ही पुलिस पहुंची , न ही मजदूरों को हटाया गया। नतीजा यह है कि दिन में ईंट-रेत का ट्रैक्टर आता है, शाम को सीमेंट और लोहे का सामान, और रात में भी काम चलता है—जैसे कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की “सुविधाजनक चुप्पी” ही इन अवैध निर्माणों की सबसे बड़ी ताकत है।
चंडी मंदिर के पास पर्दों के पीछे चल रहा खेल
निर्माण स्थल के चारों ओर मोटे कपड़े और टिन की चादरें लगाकर काम किया जा रहा है, ताकि बाहर से किसी को दिखे नहीं। अंदर मजदूर लगातार ईंटें जोड़ रहे हैं, छत के लिए लोहे के गार्डर डाले जा रहे हैं, और तेज़ी से दीवारें खड़ी हो रही हैं।
आसपास के लोगों का कहना है कि यहां हो रहे निर्माण का पैमाना इतना बड़ा है कि यह महज ‘छोटा-मोटा मकान’ नहीं बल्कि पूरी इमारत खड़ी की जा रही है।
जनता में आक्रोश – बहिष्कार की चेतावनी
इलाके के निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो वे खुद मौके पर पहुंचकर निर्माण रोकेंगे और ‘यूथ बंसल’ कपड़े की दुकान का बहिष्कार करेंगे।
लोगों का कहना है, “जब कोर्ट का आदेश और कानून मिलकर भी अवैध काम नहीं रोक पा रहे, तो जनता को ही आगे आना पड़ेगा।”

