
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से पचरीघाट, जूना बिलासपुर में रविवार, 10 अगस्त 2025 को भोजली महोत्सव 2025 का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष देवेन्द्र पाठक की सक्रिय उपस्थिति और नेतृत्व ने पूरे कार्यक्रम को विशेष पहचान दी।
सुबह से ही जय जोहार के नारों, पारंपरिक गीत-संगीत और ढोल-मांदर की थाप पर नगरवासी एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में आयोजन स्थल पर जुटे। माहौल में लोक संस्कृति का उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मंडल अध्यक्ष देवेन्द्र पाठक ने भोजली महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमारी सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि नागपंचमी के दिन जौ के दाने बोए जाते हैं, जिन्हें आठ दिनों तक स्नेहपूर्वक सींचकर भोजली के दिन जल में विसर्जित किया जाता है। किसान इस परंपरा के माध्यम से माँ भोजली से भरपूर फसल और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की ‘मितान’ परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जिसमें परिवारों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी भाईचारे का रिश्ता कायम रहता है। यही हमारी सामाजिक शक्ति और सांस्कृतिक धरोहर है।
आयोजन के दौरान संजोही लोक कला मंच की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवाओं ने भोजली के साथ विसर्जन यात्रा में भाग लिया। हरे अंकुरित जौ से सजी टोकरी, लोकगीत और नृत्य की थाप इस यात्रा के प्रमुख आकर्षण रहे।
भोजली महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी है — और इस वर्ष का आयोजन देवेन्द्र पाठक के नेतृत्व में एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव बन गया।



