
कटघोरा/कोरबा। कटघोरा स्थित त्रिलोकी पब्लिक स्कूल को लेकर फीस, किताब-कॉपी, परिवहन सहित अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं। एक अभिभावक द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को दिए गए शिकायत पत्रों में कई आरोप लगाए गए हैं। वहीं स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विद्यालय में सभी विद्यार्थियों को समान अवसर देने की बात कही है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, एक अभिभावक ने 31 जुलाई 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी, कोरबा को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि उनके बच्चे की स्कूल फीस एवं ट्रांसपोर्ट सहित कुल 41,900 रुपये का भुगतान किया गया था। बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने के बाद फीस वापसी को लेकर अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद होने का दावा किया गया है।
शिकायत में स्कूल की किताब-कॉपी और कवर को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। अभिभावक का कहना है कि किताब-कॉपी के लिए निर्धारित दुकान से सामग्री लेने का दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इसी मामले से संबंधित एक अन्य शिकायत में किताबों को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने एक पुस्तक का MRP 920 रुपये होने के बावजूद 1000 रुपये लिए जाने का दावा किया है। इस संबंध में भी शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
एक अन्य आवेदन में स्कूल की फीस, परिवहन, किताब-कॉपी तथा विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता की ओर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवेदन दिए जाने की बात दस्तावेजों से सामने आती है।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, त्रिलोकी पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। प्रबंधन का कहना है कि विद्यालय में समाज के हर वर्ग के बच्चे अध्ययनरत हैं। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के साथ-साथ अन्य परिवारों तथा सरकारी अधिकारियों के बच्चे भी यहां पढ़ाई कर रहे हैं।
प्रबंधन के अनुसार स्कूल का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा, अनुशासन और संस्कार प्रदान करना है। विद्यालय में किसी भी बच्चे के साथ आर्थिक या सामाजिक आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर देने का प्रयास किया जाता है।
स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि यदि किसी अभिभावक या विद्यार्थी को फीस, किताब-कॉपी, परिवहन अथवा किसी अन्य विषय को लेकर समस्या है तो वह सीधे स्कूल प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रख सकता है। प्रबंधन ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को अपनी प्राथमिकता बताया है।
शिकायतों पर जांच जरूरी
पूरे मामले में फिलहाल एक पक्ष की ओर से शिकायतें और आरोप हैं, जबकि दूसरे पक्ष यानी स्कूल प्रबंधन ने उन आरोपों को खारिज किया है। इसलिए किसी भी पक्ष को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराने से पहले संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
फीस रसीद, स्कूल की निर्धारित फीस संरचना, किताबों के बिल और MRP, संबंधित दुकानदार के रिकॉर्ड तथा स्कूल की नीतियों की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ऐसे में अब निगाहें संबंधित शिक्षा विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर हैं। जांच में यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है, जबकि आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन का पक्ष भी और स्पष्ट हो जाएगा।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों में शिकायतकर्ता के आरोप और स्कूल प्रबंधन का पक्ष दोनों सामने हैं। अंतिम सच्चाई जांच और दस्तावेजी तथ्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगी।

