बीजेपी पार्षदों के वार्डों में बिना टेंडर कार्य पूर्ण कराने का आरोप, वहीं कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में एक साल से टेंडर का दिया जा रहा हवाला

कोरबा। बाँकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में विकास कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। विपक्षी कांग्रेस पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन पर जनहित के कार्यों में पक्षपात करने और निर्माण कार्यों में टेंडर प्रक्रिया के नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष सहित कांग्रेस पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका क्षेत्र में बीजेपी पार्षदों के वार्डों में बिना टेंडर प्रक्रिया पूरी हुए ही निर्माण कार्य करा दिए गए, जबकि कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों के लिए पिछले लगभग एक साल से टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर काम टाले जा रहे हैं। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए हैं, तो उनके क्रियान्वयन में राजनीतिक दल देखकर प्राथमिकता क्यों तय की जा रही है?

नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास एवं अन्य पार्षदों ने बताया कि लगभग 10 महीने पहले बीटी सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया था। हालांकि, करीब 10 महीने बाद उक्त टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी कर दिया गया। इस दौरान कांग्रेस पार्षदों को यही बताया जाता रहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। पार्षदों के अनुसार पुराने ठेकेदार ने भी काम करने से इनकार कर दिया था।
विपक्षी पार्षदों ने आगे आरोप लगाया कि नए टेंडर की प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है। उनके मुताबिक टेंडर खुलने की निर्धारित तिथि 19 नवंबर 2026 है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित स्थान पर भूमिपूजन कर निर्माण कार्य भी पूरा करा दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब टेंडर खुलने की प्रक्रिया ही बाकी थी, तो निर्माण कार्य किस स्वीकृति और किस प्रक्रिया के तहत कराया गया?
कांग्रेस पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जिलाधीश से मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्यों की स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश, भुगतान और निर्माण कराने वाली फर्म की जांच कराई जाए। साथ ही यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित फर्म, स्वीकृति देने वाले अधिकारियों और निर्माण कार्य कराने के लिए जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में शिकायत करने वालों में नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास, पार्षद तेजप्रताप सिंह, राजकुमार मिश्रा, राकेश अग्रवाल, संदीप डहरिया, शाहिद कुजूर एवं हेमंत शहानी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
अब देखने वाली बात होगी कि जिलाधीश द्वारा इस शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और नगर पालिका में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया एवं वार्डों में विकास कार्यों के वितरण को लेकर उठे सवालों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।


